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कर्नाटक से महागठबंधन का ‘मिशन 2019’ पर काम शुरू, पहली बार यूपी के बाहर किसी राज्य में BSP विधायक बनेंगे मंत्री

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कर्नाटक की कांग्रेस-जदएस गठबंधन सरकार में बसपा को भी शामिल किया जाएगा। BSP के एकलौते विधायक को भी मंत्री पद की शपथ दिलाई जाएगी

नई दिल्ली। कर्नाटक से महागठबंधन का ‘मिशन 2019’, चुनाव को लेकर कर्नाटक में दिखी विपक्षी एकता अब मीलों साथ चलने को तैयार है। दरअसल, राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी गठबंधन को मजबूत आधार देने के लिए अहम कदम उठाते हुए कर्नाटक की कांग्रेस-जदएस गठबंधन सरकार में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) को भी शामिल किया जाएगा। इसका मतलब साफ है कि आने वाले आम चुनाव में महागठबंधन एकजुट होकर भाजपा के खिलाफ चुनावी मैदान में दमखम दिखाता नजर आएगा।

बता दें कि कर्नाटक सरकार के इस फैसले के बाद अब कांग्रेस और जदएस के विधायकों के साथ बसपा के एकलौते विधायक एन महेश को भी मंत्री पद की शपथ दिलाई जाएगी। मुख्यमंत्री बनने के एक पखवाड़े बाद एचडी कुमारस्वामी बुधवार (आज) को अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करने जा रहे हैं। पहले चरण के इस विस्तार में 20 से ज्यादा मंत्रियों को शपथ दिलाई जा सकती है।

किसके हिस्से कौन सा मंत्रिमंडल

मुख्यमंत्री ने मंगलवार को कहा कि मंत्रिमंडल के पहले चरण के विस्तार में जदएस के आठ से नौ विधायकों को शामिल किया जाएगा। उन्होंने बताया कि कांग्रेस को गृह, सिंचाई, स्वास्थ्य, कृषि और महिला बाल कल्याण विभाग मिले हैं, जबकि जदएस को वित्त एवं आबकारी, लोक निर्माण विभाग, शिक्षा, पर्यटन और परिवहन मंत्रालय दिए गए हैं।

UP के बाहर पहली बार किसी राज्य में बसपा विधायक बनेंगे मंत्री

कांग्रेस आला कमान ने भी राष्ट्रीय स्तर पर 2019 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा को चुनौती देने की जरूरत को देखते हुए इस पर हामी भर दी है। बसपा के लिए यह पहला मौका है जब पार्टी उत्तर प्रदेश के बाहर दक्षिण भारतीय राज्य में सरकार में शामिल होने जा रही है। मंगलवार शाम जदएस और कांग्रेस के शीर्ष रणनीतिकारों की लंबी चर्चा में बसपा को सरकार में शामिल करने का फैसला लिया गया।

जदएस महासचिव दानिश अली ने निभाई अहम भूमिका

कर्नाटक में गठबंधन सरकार के कामकाज की देखरेख के लिए बनी कांग्रेस-जदएस समन्वय समिति के संयोजक बनाए गए जदएस महासचिव दानिश अली ने दैनिक जागरण से बसपा के सरकार में शामिल होने की पुष्टि की।माना जा रहा है कि दानिश ने बसपा को सरकार में शामिल कराने में खास भूमिका निभाई है। बसपा का जदएस से चुनाव पूर्व गठबंधन कराने में भी उनका रोल रहा था।

रणनीति के तहत आगे बढ़ रहे विपक्षी दल

बसपा को सरकार में शामिल करने की रणनीति से साफ है कि विपक्ष राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी खेमे में बिखराव के भाजपा के सियासी दावे को पंक्चर करने की जवाबी रणनीति पर भी काम कर रहा है। कैराना में अपनी गोलबंदी की कामयाबी के बाद जनता के बीच भाजपा को तगड़ी चुनौती देने का संदेश देने के लिए विपक्ष अब हर सियासी मौके का फायदा उठाने की कोशिश में है। विपक्षी खेमा इस दांव के जरिये दलित समुदाय को भी संदेश देने की कोशिश करेगा। खास तौर पर हाल के समय में गुजरात और राजस्थान में दलित उत्पीड़न की घटनाओं को लेकर विपक्ष ने सियासी निशाना साधते हुए जिस तरह भाजपा को जिम्मेवार ठहराया है उसे देखते हुए बसपा का सरकार में शामिल होना सियासी मायने रखता है।

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